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वॉशिंगटन: अमेरिकी सीनेट में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जुड़ी जांच को लेकर रिपब्लिकन और डेमोक्रेट नेताओं के बीच तीखा राजनीतिक टकराव देखने को मिला। जहां रिपब्लिकन नेताओं ने इस जांच को “मॉडर्न वॉटरगेट” करार दिया, वहीं डेमोक्रेट्स ने इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया।
सीनेट की ज्यूडिशियरी सबकमेटी की एक बैठक के दौरान टेक्सास के रिपब्लिकन सीनेटर टेड क्रूज ने आरोप लगाया कि पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल में जस्टिस डिपार्टमेंट ने अत्यधिक व्यापक जांच की अनुमति दी थी। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान करीब एक लाख निजी संचार तक पहुंच बनाई गई, जिससे एक दर्जन से अधिक सीनेटरों और हजारों लोगों की निजता प्रभावित हुई।
टेड क्रूज ने इस पूरे मामले को “मॉडर्न वॉटरगेट” बताते हुए कहा कि यह पिछले घोटालों से भी अधिक गंभीर है, क्योंकि इसमें सरकारी शक्तियों का पूर्ण उपयोग किया गया। रिपब्लिकन नेताओं का आरोप है कि जांच के तहत करीब 200 सबपोएना जारी किए गए और 400 से अधिक रिपब्लिकन समर्थित व्यक्तियों व संगठनों को निशाना बनाया गया।
इस मामले पर सीनेटर माइक ली ने इसे बेहद चिंताजनक बताया, जबकि जॉन केनेडी ने सवाल उठाया कि टेलीकॉम कंपनियों ने इन आदेशों का पालन क्यों किया। टेड क्रूज ने यह भी आरोप लगाया कि एफबीआई ने फोन टोल रिकॉर्ड्स हासिल किए, जिनमें कई प्रतिनिधियों का डेटा शामिल था। उनके अनुसार, सीनेट के लगभग 20 प्रतिशत रिपब्लिकन सदस्यों का डेटा एकत्र किया गया।
रिपब्लिकन पक्ष के गवाहों ने भी इन आरोपों का समर्थन किया। लीगल एनालिस्ट विल चैंबरलेन ने दावा किया कि एफबीआई ने ट्रंप कैंपेन की सलाहकार सुसी वाइल्स और उनके वकील के बीच फोन कॉल रिकॉर्ड किए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह बिना अनुमति हुआ, तो यह अवैध वायरटैपिंग का मामला हो सकता है।
दूसरी ओर, डेमोक्रेट्स ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया। रोड आइलैंड के सीनेटर शेल्डन व्हाइटहाउस ने कहा कि फोन रिकॉर्ड के लिए सबपोएना जारी करना किसी भी जांच की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित व्यक्तियों की जांच में भूमिका थी।
डेमोक्रेट्स ने रिपब्लिकन से स्पेशल काउंसल जैक स्मिथ को गवाही के लिए बुलाने की मांग की। एक अन्य डेमोक्रेटिक सीनेटर ने इस सुनवाई को “राजनीतिक अभियान” बताया, जबकि हवाई की सीनेटर मेजी हिरोनो ने कहा कि रिपब्लिकन पुराने मुद्दों को फिर से उठा रहे हैं।
इस बीच, गवाह के रूप में पेश हुए पूर्व एफबीआई अधिकारी क्रिस्टोफर ओ’लेरी ने एजेंसी का बचाव करते हुए कहा कि एफबीआई की जांच तथ्यों और सबूतों पर आधारित होती है, न कि किसी राजनीतिक विचारधारा पर। हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि हाल के समय में एजेंसी के कर्मचारियों की बर्खास्तगी से राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
